रविवार, 13 सितंबर 2026
डिजिटल असमानता: भारत का सबसे खतरनाक नया विभाजन
Durgesh Kumar Yadav | ब्लॉग
आज भारत में सबसे गहरा सामाजिक विभाजन जाति, धर्म या पैसे का नहीं रह गया है। एक नया और चुपचाप बढ़ता हुआ विभाजन है — डिजिटल असमानता।
एक तरफ वे युवा हैं जिनके पास स्मार्टफोन, तेज इंटरनेट और डिजिटल समझ है। वे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जॉब पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं और डिजिटल भुगतान से अपना काम चला रहे हैं। दूसरी तरफ करोड़ों लोग हैं — खासकर गाँव के गरीब, महिलाएँ, बुजुर्ग और हाशिए के समुदाय — जो अभी भी इस दौड़ में बहुत पीछे हैं।
सिर्फ फोन और इंटरनेट काफी नहीं
सरकार ने डिजिटल इंडिया का नारा दिया और स्मार्टफोन व इंटरनेट पहुँचाने की कोशिश की। लेकिन असली समस्या सिर्फ पहुँच की नहीं है। समस्या समझ और अवसर की है।
कई गाँवों में नेटवर्क तो आ गया है, लेकिन लोग उसका इस्तेमाल सिर्फ व्हाट्सऐप, रील और यूट्यूब तक सीमित रखते हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरना, डिजिटल भुगतान करना, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करना या सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करना अभी भी उनके लिए मुश्किल काम है।
शिक्षा और रोजगार में सबसे बड़ा फर्क
यह असमानता शिक्षा में सबसे खतरनाक रूप ले रही है। शहर के बच्चे ऑनलाइन कोचिंग, यूट्यूब ट्यूटोरियल और डिजिटल लाइब्रेरी का फायदा उठा रहे हैं। वहीं गाँव के बच्चे अभी भी किताबों की कमी और शिक्षकों की अनुपस्थिति से जूझ रहे हैं।
रोजगार में भी यही हाल है। आज कई कंपनियाँ डिजिटल स्किल्स को प्राथमिकता देती हैं। जो युवा इन स्किल्स से वंचित हैं, वे दौड़ शुरू होने से पहले ही पिछड़ जाते हैं।
क्या किया जा सकता है?
सरकार ने कई योजनाएँ चलाई हैं — डिजिटल साक्षरता मिशन, कॉमन सर्विस सेंटर आदि। लेकिन इनका असर अभी भी सीमित है। असली बदलाव तब आएगा जब:
- डिजिटल शिक्षा को स्कूलों के नियमित पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए
- महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आसान और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ
- स्थानीय भाषाओं में ज्यादा से ज्यादा उपयोगी कंटेंट उपलब्ध कराया जाए
आखिरी बात
डिजिटल असमानता सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं है। यह सामाजिक न्याय का सवाल है। अगर हमने इसे समय रहते नहीं संभाला, तो आने वाले वर्षों में यह खाई और गहरी होती जाएगी।
एक सच्चा डिजिटल भारत तभी बनेगा, जब उसमें हर नागरिक की बराबर भागीदारी हो — चाहे वह महानगर का युवा हो या दूरदराज के गाँव का किसान।
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